स्‍वास्‍थ्य संबंधी होमियोपैथिक त्रैमासिक पत्रिका

भारत सरकार के समाचार पत्रों के कार्यालय द्वारा अनुबंधित R.N.I. No. 52490/92 ( New No. BIHHIN.3485)

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   होमियो गगन के रजत जयंती एवं १००वें (शताब्दी अंक) के विमोचन समारोह के यादगार क्षण

अक्टूबर-दिसम्बर 2022 अंक  ( नवीनतम अंक )

आपके अनुभव विशेषांक भाग -5 ( 31वें वर्ष का प्रथम अंक)

प्रमुख आकर्षण :

  • बैच फ्लावर रेमेडीज

  • मानसिक लक्षण एक नज़र में

  • फासफोरस के बारे में मेरे क्लिनिकल अनुभव

  • कैमोमिला : एक अध्ययन

  • Adenexal Cyst Case

  • Kill Desire... अर्थात मार डालने की इच्छा

  • साईलेशिया : एक अध्ययन

  • एकांगी लक्षण और रेपर्टराइजेशन

  • Rubric Explanation

  • HSH Rubric Study

  • हींग का होमियोपैथिक प्रयोग

  • डेंगू निदान एवं चिकित्सा एवं अनेकों ज्ञानवर्धक लेख एवं स्थायी स्तंभ


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जुलाई- सितम्बर 2022 अंक अप्रैल-जून 2022 अंक जनवरी-मार्च 2022 अंक
आपके अनुभव विशेषांक भाग - आपके अनुभव विशेषांक भाग -३ इन्फेक्सन रोग विशेषांक
 

Samuel Hahnemann

Dr. Binay Kr. Gupta
Editor, Homoeo Gagan

 

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प्रधान संपादक
डॉ० विनय कुमार गुप्ता
सहयोगी संपादक
श्री प्रदीप कुमार
डॉ० तुषार कुमार

संरक्षक
डॉ० महेश प्रसाद गुप्ता( भागलपुर)
श्री बालकृष्ण शरण गुप्ता( गोरखपुर)
श्री कैलाश गुप्ता( दिल्ली)
श्री श्याम प्रकाश गुप्ता( दिल्ली)
सलाह्कार मंडल
डॉ० वी० के० रस्तोगी (लखनऊ)
डॉ० वी० पी० बंसल (इन्दौर)
डॉ० गिरिश गुप्ता (लखनऊ)
डॉ० एस० एम० सिंह ( इलाहाबाद)
डॉ० एन० के० रावत (छतरपुर, म० प्र०)
डॉ० देवश्लोक शर्मा, झारसुगुड़ा, (उड़ीसा)
डॉ० एस० के० तिवारी, मैंगलोर
डॉ० बी० पी० श्रीवास्तव, कोलकाता, प० बंगाल
डॉ० बी० पी० पांडा, राजकोट, गुजरात
डॉ० पी० पी० सिंह, रायपुर, छत्तीसगढ़
डॉ० एस० के० पंजीकार
डॉ० ए० के० सिन्हा, एम० बी० बी० एस०
डॉ० पी० एस० सिन्हा, भोपाल
डॉ० गोपाल पंडित

डॉ० एच एस मथारु
डॉ०
अशोक अवधिया

जुलाई 91 से होमियो जीवन के नाम से पत्रिका प्रकाशन कार्य आरंभ किया गया था. प्रथम अंक " शिशु रोग विशेषांक" के रूप में प्रकशित हुआ था. सितम्बर 92 तक होमियो जीवन के नाम से ही पत्रिका प्रकाशित होती रही. जुलाई 91 सेसितम्बर 92  तक कुल चार अंक प्रकाशित हुए थे.

इस बीच इस पत्रिका के निबंधन हेतु प्रयास भारत सरकार के समाचार पत्रों के कार्यालय, नई दिल्ली में कि गई थी किन्तु होमियो जीवन नाम को हमें आवंटित नहीं किया गया. अन्य नामों की चर्चा होती रही, कार्यवाई कि जाती रही. अंततः अक्टूबर 1992  में
"होमियो गगन"
 नाम हमें आवंटित किया गया. अतः अक्टूबर 1992  से "होमियो गगन" के नाम से ही पत्रिका निरंतर प्रकाशित की जा रही है.

.......विस्तारपुर्वक जानकारी........

डॉ० विनय गुप्ता, सम्पादक, होमियो गगन"होमियो साहित्य रत्न  सम्मान " से अलंकृत

 

सदस्यता के लिये नियम एवम शर्तें

 

होमियोगगन के वितरक

 

-: होमियो गगन प्रकाशन के अनुपम भेंट :-

Medicines by Dr. Binay Gupta

आयुष निदान

मनःयौन समस्याओं का होमियोपैथिक निदान सुलभ होमियो दर्द चिकित्

लेखक :
डा० राजीव सक्सेना

लेखक :
डा० राजीव सक्सेना
लेखक :
डा० नवल किशोर रावत

What they say...    


H
omoeopathy did not merely seek to cure a disease but treated a disease as a sign of the whole human organism. This was also recognized in the upanishadic thought which spoke of human organs as combination of body, mind and spirit. Homoeopathy would play an important part in the public health of the country along with other systems.

 

Homoeopathy is the latest and refined method of treating patient economically and nonviolently. Government must encourage and patronise it in our country.

 

It is not merely a collection of few medicines, but a new science with a rational philosophy as its base. We require more scientific interest and enquiry into the matter with special stress upon Indian Environments.

S. Radhakrishnan  
(Ex President of India)

 M. K. Gandhi
(Father of the Nation)

Rabindra Nath Tagore 

 

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